आप इस बारे में कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप अपना अनंत जीवन परमेश्वर के साथ बिताएंगे?/कार्यक्रम 4

द्वारा: Dr. Erwin Lutzer; ©2003

क्यों हमारे समाज में जबकि बहुत सारे लोग कहते हैं कि, “तुम्हें पता है उसने नया जन्म पाया हुआ था,” तो वास्तव में बाइबल एक “नया जन्म” पाये हुए मसीही के बारे में क्या सिखाती है?

परिचय

उद्घोषक: आज The John Ankerberg Show पर पूछा जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रश्न यह है कि: “आप इस बारे में कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप अपना अनंत जीवन परमेश्वर के साथ बिताएंगे?”

Dr. Erwin Lutzer इस बारे में कुछ इस तरह सोचते हैं. अपनी मृत्यु के ठीक एक मिनट बाद ही आप अपने आप को मसीह और स्वर्ग की महिमा देखते हुए पाएँगे या फिर आप कुछ इतना भयानक पाएँगे कि जिसकी आज आप कल्पना भी नहीं कर सकते. मेरा मतलब है, जब आप रुक कर इसके बारे में सोचते हैं तो जो महत्वपूर्ण प्रश्न हम पूछ सकते हैं वह यह है कि हम अपना अनंत जीवन कहाँ बिताएंगे.

इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए जॉन के अतिथि हैं डॉ. इरविन लुत्ज़र, जो कि मूडी मेमोरियल चर्च शिकागो, इलेनॉइस में पासबान हैं. वे इस प्रश्न का भी उत्तर देंगे कि: यीशु ने यह क्यों सिखाया कि बहुत से धार्मिक लोगों के चेहरों के समक्ष स्वर्ग का द्वार बंद कर दिया जाएगा? परमेश्वर में एक झूठे विश्वास तथा सच्चा उद्धार प्राप्त करने वाले विश्वास में क्या अंतर है? क्या एक व्यक्ति इस बात को निश्चित रूप से जान सकता है कि वह स्वर्ग जा रहा है?

हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप इस महत्वपूर्ण जानकारी को सुनें.

Ankerberg: आपका स्वागत है. हम इस विषय पर बात कर रहे हैं कि आप इस बात के प्रति कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप अपना अनंत जीवन परमेश्वर के साथ बिताएंगे. और मैं सोचता हूँ ये कुछ ऐसी बात है जिसके बारे में हर कोई सुनिश्चित होना चाहता है. प्रश्न यह है, “आपको इसका निश्चय कैसे हो सकता है?” और पिछले सप्ताह हम सिर्फ मसीह में विश्वास द्वारा धर्मी ठहराए जाने के बारे में बात कर रहे थे. अब ये सब तो बड़े अच्छे शब्द हैं. इरविन, जरा हमें पिछला याद दिलाईये. हम क्या बात कर रहे थे? यह इतना आवश्यक क्यों है? इसे अच्छे से समझाईये.

Lutzer: आपको पता है, जैसा कि हमने पिछले सप्ताह सीखा, हमें स्वर्ग जाने के लिए सिद्ध होने की जरुरत है. और ये बात लोगों को चौंकाती है, क्योंकि हम सब जानते हैं कि वास्तव में, अनुभव के अनुसार हम सिद्ध नहीं हैं. हम सब पापी हैं. लेकिन शुभ-सन्देश यह है कि जब हम अपना भरोसा सब जगह से हटाकर सिर्फ यीशु ही के ऊपर लगाते हैं तो वो हमारे पाप ले लेता है और हमें अपनी धार्मिकता दे देता है, इसलिए जहाँ तक परमेश्वर का सम्बन्ध है हम सिद्ध हैं.

उदाहरण के लिए, मुझे बस यहाँ एक उदाहरण देते हैं. मुझे यहाँ अपनी पुस्तकों में से एक ले. मैं उसमें शिकागो एड्स की मृत्यु हो गई कौन एक आदमी याद है. वह महाप्रतापी परिवर्तित परमेश्वर क्षमा बचत अनुग्रह है की एक उदाहरण के लिए, मैं यहाँ पर आपको एक दृष्टांत बताना चाहता हूँ. मैं आपकी पुस्तकों में से एक लेता हूँ. मुझे वो आदमी याद है जो शिकागो में एड्स से मर गया था. वह एक समलिंगी वैश्यावृति करने वाला था लेकिन वह मसीह के उद्धार देने वाले विश्वास में आया और महिमान्वित रूप से परिवर्तित हो गया परमेश्वर के उद्धार देने वाले और क्षमा करने वाले अनुग्रह के बारे में उसने अद्भुत गवाही दी. मान लेते हैं वो पुस्तक ‘THE LIFE AND TIMES OF ROGER’ है. हम इसमें देखते हैं और जो उसमें हमें मिलता है वह सब अशुद्धता और पाप और छल और कामुकता और अनाज्ञाकारिता है. यह वास्तव में एक गन्दी पुस्तक है.

लेकिन मान लेते हैं जॉन, कि हमारे पास यहाँ एक और किताब भी है, अगर हम कल्पना कर सकें तो उसका नाम है, ‘THE LIFE AND TIMES OF JESUS CHRIST’ हम पुस्तक को खोलते हैं. यह एक ऐसे जीवन की कहानी है जिसमें सुन्दरता और आज्ञाकारिता और सिद्धता है. आइये ऐसा मानते हैं कि यीशु अपनी पुस्तक की सारी विषयवस्तु, सारे पन्ने ले लेता है, और रॉजर से कहता है, “मैं तेरी पुस्तक की सारी विषयवस्तु लेने वाला हूँ. मैं तेरी पुस्तक के सारे पन्ने निकाल दूंगा. सिर्फ तू मुझे अपना आवरण पृष्ठ दे दे.” अतः रॉजर यीशु को अपना आवरण पृष्ठ दे देता है. यीशु अपने पन्ने लेता है और उन्हें रॉजर की पुस्तक में रख देता है. अब आपको क्या मिलता है? हम एक पुस्तक देखते हैं जिसका शीर्षक है THE LIFE AND TIMES OF ROGER. हम उसके अन्दर देखते हैं और हमें क्या दिखाई देता है? कुछ नहीं बस सुन्दरता, सिद्धता, आज्ञाकारिता, पवित्रता, परमेश्वर की धार्मिकता. यहाँ तक कि यह पुस्तक इतनी सुन्दर है कि परमेश्वर भी इसको बहुत पसंद करता है. यही सुसमाचार है – जिसमें क्रूस पर यीशु की आज्ञाकारिता और क़ुरबानी हमारे लिए प्रतिस्थापित की गई है, और हम उसकी योग्यता के आधार पर बचाए गए हैं. और विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने का मतलब यही है. इसका मतलब है कि जो यीशु ने किया हम उसके द्वारा धर्मी घोषित किये जाते हैं. यह वो घोषणा है जो परमेश्वर स्वर्ग में हमारे लिए करता है.

लेकिन जॉन, आज हमारे कार्यक्रम में उद्धार के अन्य पहलु पर बात की जाएगी. हम उस कार्य के बारे में बात कर रहे हैं जिसे परमेश्वर मनुष्य के हृदय में उसी समय करता है जब लोग मसीह को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करता है.

Ankerberg: हाँ. लोग कहेंगे, “ठीक है, यदि धर्मी ठहराया जाना परमेश्वर की ओर से मेरे बारे में कानूनी घोषणा है जिसे वो मेरे बारे में अनंत रूप में करता है, कि यीशु के कारण मैं अब अपने पापों के लिए दोषी न रहा” – या फिर यदि आप चाहते हैं तो एक स्थानान्तरण होता है – हमारे पाप मसीह पर डाल दिए जाते है, मसीह पर दोषारोपित कर दिए जाते हैं और वह उनकी कीमत चुकाता है, उसने इनकी कीमत क्रूस पर चुका दी – सच्चाई यह है, यह मसीह की धार्मिकता, उसका सिद्ध जीवन, उसके जीवन का प्रभाव है जो अगर आप चाहें तो वह आपके और मेरे लिए कानूनी रूप से दिये गए हैं. घोषणा यही है. अब मैं मसीह में परमेश्वर के सामने खड़ा होता हूँ. तो यह वो जगह है जहाँ पर यह स्थानान्तरण THE LIFE AND TIMES OF ROGER के बारे में होता है, मसीह के जीवन की विषय-वस्तुएं रॉजर के आवरण में डाल दी गयीं और अब हम मसीह में परमेश्वर के सम्मुख सिद्ध रूप में खड़े हैं. लेकिन लोग कहते हैं, “ठीक है, ये जो होता है यह तो एक कानूनी घोषणा है.” जो वे जानना चाहते हैं वो यह है, क्या इसके अलावा आपके अन्दर भी कुछ होता है?

Lutzer: बिल्कुल.

Ankerberg: दूसरे शब्दों में, इस नए जन्म में क्या सब होता है?

Lutzer: ठीक है, यीशु के शब्दों को सुनें. वास्तव में इन मसलों पर हमारा अधिकार उसी में है. निकोदिमुस जो वास्तव में एक फरीसी था…. अब ये जो फरीसी थे ये कई मामलों में अच्छे लोग थे, लेकिन वे कायदे कानूनों से प्यार करते थे, ऐसे कायदे जिनका पालन वे खुद भी नहीं कर पाते थे. सच तो यह है कि वे लोगों के ऊपर इनका भार डालते थे. उन्हें लोगों के ऊपर धर्म की काठी कसना अच्छा लगता था, लेकिन कोई भी इन सारे कायदे कानूनों का पालन नहीं कर पाता था. लेकिन एक आदमी था जिसके अन्दर परमेश्वर के लिए इक्छा थी. वह रात में यीशु के पास आता है. इस बात से यह पता चलता है कि वो यह नहीं चाहता था कि कोई इस बात को जाने कि वह यीशु के पास आया है. और उसने जो कहा वह बात यूहन्ना के तीसरे अध्याय में पाई जाती है, “आप एक शिक्षक हो, जो परमेश्वर की ओर से आये हो, क्योंकि हम जानते हैं कि जब तक परमेश्वर आपके साथ न हो आप वो काम नहीं कर सकते जो आप कर रहे हो” [यूहन्ना 3:2]. और यीशु ने कुलीन रहते हुए बिना पूछे ही पद 3 में जो कहा वह सब लोगों के लिए ध्यान से सुनना जरुरी है: “मैं तुझसे सच सच कहता हूँ कि जब तक कोई नए सिरे से न जन्में वह परमेश्वर के राज्य को नहीं देख सकता” [यूहन्ना 3:3].

जॉन, एक दिन मैं एक आदमी से बात कर रहा था और उसने मुझसे कहा, “ओह, मैं तो एक मसीही हूँ, लेकिन मेरा नया जन्म नहीं हुआ है.” जो बात मुझे उस व्यक्ति को बतानी थी वो यह है कि आप पमेश्वर के राज्य की ओर नहीं जा रहे हैं. क्योंकि हम इसको मसीह के अधिकार के द्वारा ही प्राप्त कर सकते हैं: जब तक आपका नया जन्म नहीं होता, आप परमेश्वर के राज्य को देख भी नहीं सकते.

अब जो बात यीशु उससे कह रहे थे उसे निकोदिमुस समझ नहीं पा रहा था. वह तुरंत बच्चे के जन्म के बारे में सोचता है इसलिए वो कहता है, “एक व्यक्ति बूढा होने पर किस प्रकार जन्म ले सकता है? निश्चित रूप से वह अपनी माँ के गर्भ दूसरी बार प्रवेश करके फिर से पैदा नहीं हो सकता. यीशु ने उसे उत्तर दिया, मैं तुम से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई जल और आत्मा से ना जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य को नहीं देख सकता” [यूहन्ना 3 :4-5]

अब जैसे ही हम इसको पढ़ते हैं कुछ लोगों को यहाँ पर बपतिस्मा दिखाई देने लगता है, लेकिन सच तो यह है कि मूल ग्रन्थ में बपतिस्मा शब्द नहीं है. क्या मैं बहुत ही आदर के साथ कह सकता हूँ कि निकोदिमुस ने भी इसको किसी तरह से बपतिस्मा नहीं समझा होगा. यीशु चाहता था कि वह इन बातों को जाने, तो फिर जब यीशु ने उससे यह कहा कि “जल और आत्मा से जन्म लेना” तो निकोदिमुस इसके बारे में क्या सोच रहा होगा? उसने यहेजकेल 36:25 जैसे अनुच्छेद के बारे में सोचा होगा जहाँ परमेश्वर कहता है, “मैं तुझे शुद्ध करने वाला हूँ. मैं तुझ पर जल छिड़कुंगा, और मैं तुझे फिर से नया करूंगा और तुझे एक नया दिल दूंगा.” बाइबल में, परमेश्वर के द्वारा धोया जाना, शुद्ध किया जाना, अक्सर सीधा पवित्रात्मा के कार्य से सम्बंधित है और मैं सोचता हूँ यहाँ पर यीशु वास्तव में पानी के बपतिस्में के बारे में बात नहीं कर रहा है. वास्तव में पुराने नियम में लोगों को बपतिस्मा नहीं दिया जाता था. लोग उनके पैर और हाथों को धोते थे, लेकिन किसी भी आम व्यक्ति को बपतिस्मा नहीं दिया जाता था. तो किसी भी तरह से यीशु निकोदिमुस को यह नहीं बताना चाहता थे कि उसे बपतिस्मा लेना है. लेकिन निकोदिमुस को मालूम होगा कि पुराने नियम में यह परिवर्तित हृदय पाया जाता है जो परमेश्वर लोगों को देता था और इसे ही “पानी का छिडकाव, परमेश्वर द्वारा शुद्ध किया जाना कहा जाता था.”

वास्तव में, इसी वजह से कुछ अनुवादों में इसे इस तरह अनुवादित किया गया है: “जब तक तुम पानी अर्थात आत्मा से नहीं जन्मोगे, तब तक तुम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकोगे.” इसलिए जो हम आज कह रहे हैं, वो ये है कि जब किसी व्यक्ति को परमेश्वर द्वारा धर्मी ठहराया जाता है, जैसा कि हमने समझाया है, ठीक उसी समय उसके अन्दर कुछ होता है. वह “नया जन्म” पाता है.

नए नियम में पाया जाने वाला एक दूसरा शब्द है “पुनर्जीवित.” मुझे पता है कि यह 50$ का शब्द है, लेकिन शायद मैं इसे कुछ इस तरह समझा सकता हूँ: जहाँ परमेश्वर वास्तव में मनुष्य जाति के अन्दर एक चमत्कार करता है और हमें एक नया स्वभाव देता है जो कि परमेश्वर के जैसा ही है. यह परमेश्वर के जीवन और परमेश्वर के स्वभाव को एक इन्सान में लाना है. अब इस बात को मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ. अपने नए जन्म के बाद, जॉन, आपके अन्दर कुछ वास्तव में होता है, जो आपके अन्दर नया जन्म पाने से पहले नहीं था, क्योंकि बाइबल कहती है, “यदि कोई व्यक्ति मसीह में है तो वो एक नई सृष्टि है. पुरानी बातें बीत गईं, देखो सब कुछ नया हो गया” [2 कुरि. 5:17]. अतः एक नया दिल है जो हमें दिया गया है. और, वैसे यह उन लोगों के लिए एक जवाब भी है जो कहते हैं, “ओह, आप लोग ये कहते हो कि आप यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर सकते हो और फिर अपना जीवन जैसे तुम्हे अच्छा लगे बिता सकते हो.” अच्छा, इस बात का खतरा जरुर रहता है. लेकिन याद रखें, हम कभी भी उस तरह जीना नहीं चाहते जैसे कि हम स्वयं चाहते हैं, क्योंकि हमें नई इच्छाओं के साथ नया दिल दिया गया है. और यीशु ने कहा है “जब तक तुम नए सिरे से न जन्मों, तुम स्वर्ग राज को नहीं देख सकते” [युहन्ना 3:3]. इसलिए आज जो लोग सुन रहे हैं उनमें से जिनका नया जन्म नहीं हुआ है उन्हें बहुत ही ध्यान से सुनना चाहिए, क्योंकि यहाँ पर जो बात कर रहा है वो यीशु है.

Ankerberg: नया जन्म या नया जन्म पाना, एक ऐसा चमत्कार क्यों है जिसमें हम कोई योगदान नहीं देते हैं?

Lutzer: परमेश्वर के किसी भी चमत्कार में हम कुछ भी योगदान नहीं दे सकते. आपको पता है जब परमेश्वर ने दुनिया को बनाने का निर्णय लिया तो फिर यदि मैं और आप आस-पास भी होते – वास्तव में हम नहीं थे – तो वो यह नहीं कहता, “अच्छा तुमको ये तारे और सब चीजें बनाने का काम मालूम है. क्या तुम इसमें मेरी मदद करोगे?

आपको पता है, मुझे यह कहानी बताना अच्छा लगता है, इसको मैंने अपनी पुस्तक में इस्तेमाल किया है, आप जॉर्ज बेवर्ली शेया को जानते हैं, जो 1954 में हैरिंगे एरीना में बिली ग्राहम का एकल गायक था. वो यह गीत गा रहा था, “सितारों को अन्तरिक्ष में लगाने के लिए एक आश्चर्यकर्म की जरुरत थी.” और वहाँ एक अंग्रेज महिला थी जो उसके शब्दों को गलत समझी और बाद में उसके पास आकर बोली, “ श्रीमान शेया, “सितारों को अन्तरिक्ष में लगाने के लिए अमरीका जरुरत थी” इससे आपका क्या मतलब है!” अब, अमरीका ने कुछ बड़े ही अद्भुत काम किये हैं. हमने मनुष्य को चाँद पर पहुँचाया है. लेकिन यहाँ पर कोई ऐसा वैज्ञानिक नहीं है जो इस कार्यक्रम को सुन रहा है और जो प्रयोगशाला में जाकर पूरी दोपहर लगा कर इतना भी बना सके जिससे कि एक अणु भी बन सके. और इसी प्रकार जब परमेश्वर हमारे अन्दर कुछ नया बनाता है तो हम उसमें अपना कुछ योगदान नहीं देते हैं. जब, हम मसीह पर विश्वास करते हैं तो उसके प्रति धन्यवादित के कारण हम उसे अपने अन्दर नया काम करने की अनुमति देते हैं. लेकिन अंततः यह परमेश्वर का ही चमत्कार है. जीवन में जब एक समय आता है यह तभी होता है.

Ankerberg: इरविन, हम यहाँ पर एक विराम लेने जा रहे हैं, और जब हम वापस आएंगे, तो हम उन खतरों के बारे में बात करेंगे, जो आपने उन लोगों के बारे बताये हैं, जिन्होंने कुछ कार्य किये और सोचा कि उनका नया जन्म हो गया है, लेकिन वास्तव में वो हुआ नहीं था. लोग किसी सभा में आगे गए. लोगों ने अपने हाथ ऊपर किये. उन्होंने शायद प्रार्थना भी की हो. उन्होंने शायद निर्णय पत्र पर हस्ताक्षर भी किये हों लेकिन उनका कभी उद्धार नहीं हुआ. उन्होंने सोचा उनका उद्धार हो चुका है, मगर उनका उद्धार नहीं हुआ था. मैं सोचता हूँ आप लोगों को समझ आ गया होगा कि यह मसला कितना गंभीर है और आपको आश्चर्य हो रहा होगा कि हम आगे क्या कहने जा रहे हैं, इसलिए हमारे साथ बने रहें. हम अभी वापस आते हैं.

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Ankerberg: ठीक है हम वापस आ गए हैं. हम डॉ. इरविन लुत्ज़र से एक मुख्य विषय पर बात कर रहे हैं कि आप कैसे सुनिश्चित हो सकते हैं, आप कैसे पक्का कर सकते हैं कि आप अपना अनंत जीवन परमेश्वर के साथ बिताएंगे, ये कुछ ऐसी बात है जिसे हम सब ही पक्के तौर पर जानना चाहते हैं. और इसके बारे में बात करने के लिए हमें उन गलतियों के बारे में बात करनी होगी जो लोगों द्वारा की जाती हैं. आइये उसी तथ्य पर वापस चलते हैं कि जब हमारा मानवीय जन्म होता है तो उसमें दो तत्व शामिल होते हैं, और ये बात रुचिपूर्ण है कि बाइबल में भी दो तत्व हैं जो नया जन्म पाने में योगदान देते हैं. ये क्या हैं इनके बारे में समझाइये.

Lutzer: सबसे पहली बात, ठीक जैसे पिता और माता एक साथ मिलते हैं और पिता शुक्राणु और माता अंडाणु का योगदान देती है, और ये ही मिलकर वास्तव में एक मानव को बनाते हैं, उसी तरह से, जब यीशु नए जन्म की बात करते हैं तो वहाँ पर भी दो तत्व हैं जो एक साथ मिलते है. एक तो परमेश्वर का वचन है. यह इस प्रकार कहता है कि हमारा जन्म वचन से हुआ है जो कि सुसमाचार की सच्चाई है. और दूसरा तत्व परमेश्वर की आत्मा है. अतः परमेश्वर का वचन और परमेश्वर की आत्मा एक साथ मिलकर आपके हृदयों में एक चमत्कार उत्पन्न करने के लिए काम करते हैं, एक ऐसा चमत्कार जिसे हम अपने लिए खुद उत्पन्न नहीं कर सकते. ये एक ऐसा कार्य हैं जिसे परमेश्वर की तरफ से होना जरुरी है. सच यह है कि जब यीशु कहता है कि तुम्हे नया जन्म पाना जरुरी है, तो वो वास्तव में यूनानी में कहता है, “तुम्हें ऊपर से जन्म लेना जरुरी है.” अतः जो लोग आज हमें सुन रहे हैं, उन्हें परमेश्वर की ओर से एक चमत्कार की जरुरत है. यह एक ऐसा चमत्कार है जिसको मैंने अनुभव किया है. मुझे पता है आपने भी इसे अनुभव किया है. लेकिन बाइबल कहती है कि इसके बिना, हम परमेश्वर के राज्य को नहीं देखेंगे – और ये तो यीशु के शब्द हैं [यूहन्ना 3:3].

Ankerberg: किसी बच्चे के मानवीय लक्षणों को देखना रुचिकर होता है. आप देखते हैं एक छोटा बच्चा पैदा होता है और कहता है, “ओह, ऐसा लगता है ये माँ हैं. ऐसा लगता है ये पिताजी हैं.” उसमें कुछ लक्षण दिखते हैं. और ये सच है. ये सच है. क्या यह आत्मिक रूप से भी सही है?

Lutzer: बिलकुल सही है. यहाँ तक कि उसी के परिणाम स्वरुप, हम परमेश्वर जैसे होते है. आपको पता हैबाइबल परमेश्वर के जैसा होने के बारे में बात करती है. इसका मतलब है हमारे अन्दर कुछ परमेश्वर के गुण होने चाहिए, जैसे कि प्रेम, आनंद, शान्ति, और वे सब कार्य जो परमेश्वर का पवित्रात्मा हमारे हृदयों में उत्पन्न करता है [गल 5 :22-23]

Ankerberg: नैतिक गुण.

Lutzer: परमेश्वर के वे नैतिक गुण. अब, इसका मतलब यह नहीं कि हम कभी परमेश्वर भी बन सकते है. आपको पता है, इसका मतलब यह नहीं कि हम सब किसी तरह छोटे परमेश्वर बन जाते हैं जो इधर उधर दौड़े फिर रहे हों. नहीं, हम पूरे अनंतकाल तक भी इन्सान ही रहेंगे, लेकिन क्या यह शानदार बात नहीं कि परमेश्वर अपना स्वाभाव हमारे साथ बांटता है कि हमारे सारे संघर्षों और हमारे निरंतर संघर्षों और पापों के साथ हमें इस जीवन में ही एक सुअवसर मिल सके, हमें उन्नति करने का अवसर मिल सके ताकी हम परमेश्वर के जैसे बन सकें.

Ankerberg: अगले बिंदु पर चलते हैं और वो ये है कि, आपने अपनी पुस्तक में लोगों के लिए कुछ चेतावनियाँ रखी हैं. आप कहते हैं कि कुछ लोग एक गलियारे में चले, हाथ ऊपर उठाये, एक प्रार्थना की, लेकिन उनका कभी उद्धार नहीं हुआ.

Lutzer: यह सही है. चलिए इसपर थोडा विचार करते हैं. आइये बच्चो के बारे में बात करते हैं.

Ankerberg: ठीक है.

Lutzer: एक बच्चा मसीही परिवार में पलता बढ़ता है. उसे बताया जाता है कि उसे यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करना है. वह एक प्रार्थना करता है. शायद उसकी उम्र पाँच या छह हो. और बाद में जब वो बड़ा हो जाता है तो उसे यह अहसास नहीं रहता कि वो वास्तव में बचाया गया है, इसका कोई आश्वासन नहीं रहता. उसके माता-पिता उससे कहते हैं, “अरे, नहीं , नहीं. तुमने पाँच साल की उम्र में मसीह को ग्रहण किया क्योंकि तुमने एक प्रार्थना की थी.” अब मैं इस विषय पर बिलकुल स्पष्ट होना चाहता हूँ: मैं यह विश्वास करता हूँ कि बच्चे पाँच या छह साल की उम्र में उद्धार पा सकते हैं. लेकिन ऐसी घटनाएँ हैं जहाँ पर माता-पिता की बुद्धिमानी कहती है, “ठीक है, अगर तुम निश्चित नहीं हो तो अब इसे पक्का कर लो. तुम अपना विश्वास यीशु पर लगाओ, उसे अपनों के रूप में स्वीकार करो, और उसके परिणामस्वरूप तुम विश्वास का आश्वासन प्राप्त कर सकते हो.”
मैं अपनी ही गवाही बताता हूँ. देखो यहाँ मैं हूँ. मैं एक मसीही घर में पला बढ़ा. हर रात मैं यीशु को अपने हृदय में आमंत्रित करता था लेकिन मैं कुछ फर्क नहीं महसूस करता था. मैं कुछ अलग व्यवहार नहीं करता था. और मैं अपने आप में सोचता था, “मेरा उद्धार नहीं हो सकता, मैं कहाँ जाऊं?” 14 साल की उम्र में मेरे माता पिता ने मुझसे कहा, “तुम्हें पता है, हमें इसका निश्चय नहीं है कि तुमने कभी मसीह पर भरोसा किया था भी या नहीं.” और मैंने कहा, “ठीक है, मैंने कोशिश की, लेकिन इससे कुछ काम नहीं बना.” तब उन्होंने कहा, “तुम्हें पता है तुम्हें क्या करना चाहिए, ये वास्तव में एक विश्वास का कदम है.” और तब मुझे समझ में आया कि सर्वोचित शब्दावली वास्तव में “अपने हृदय में यीशु को आमंत्रित करना” नहीं है. जॉन, मैं यह उम्मीद करता हूँ कभी हम इसके बारे में बात करेंगे. इसे अक्सर इस्तेमाल किया जाता है मगर यह सर्वोचित शब्दावली नहीं है. आपको पता है कभी कभी छोटे बच्चे कहते हैं, “अच्छा, अगर वो अन्दर आएगा तो क्या वो खून से गीला हो जाएगा?” आपको पता है वो इसे शब्दशः अनुवादित करते हैं. सही शब्दावली यह है कि हम कहें कि, “यीशु पापियों के बदले में क्रूस पर मर गया. क्यों न आप उसे अपने पापों को उठाने वाले के रूप में ग्रहण करें और विश्वास करें?” और जब मैंने 14 वर्ष की उम्र में उसे ग्रहण किया तो मुझे उद्धार का आश्वासन हुआ.

एक खतरा बच्चों का है. दूसरा खतरा उन लोगों का है जो सभाओं में आगे आते हैं. अब ये बात बड़ी संवेदनशील है, ठीक है? लेकिन कोई व्यक्ति निमंत्रण देता है: “उद्धार पाने के लिए आगे आयें.” वास्तव में ये समस्याएँ हैं. पहली, अगर कोई व्यक्ति ऐसा हो जैसा कि मैं था, तो उसका क्या होगा, जो इतना शर्मीला था कि सैकड़ों लोगों की भीड़ में आगे नहीं जा सकता था?

Ankerberg: क्योंकि आपने सोचा कि आप आगे नहीं आ सकते, तो आप आगे जाने की बजाय नरक चले जाते हैं.

Lutzer: जॉन, तुम मेरी गवाही बिलकुल सही रूप में दे रहे हो. 10 या 11 साल की उम्र में मैं ऐसा ही महसूस कर रहा था. मैंने कहा, “अगर मुझे उद्धार पाने के लिए आगे जाना है, मुझे लगता है मैं नरक चला जाऊँगा.” मैं इतना शर्मीला था कि जब हमारे घर पर मिलने वाले लोग आते थे तो आपको पता है, मेरी बहन को मुझे पलंग के नीचे से निकालना पड़ता था.

दूसरी बात यह है कि लोगों के ऊपर हम यह प्रभाव डालते हैं कि आप आगे गए हैं तो आप बचाए जा चुके हैं.यह एक दूसरी गलत धारणा है

Ankerberg: और इसके गलत होने का कारण यह है कि लोग गलियारे में से चलकर आगे जाने के कार्य और प्रार्थना करने पर भरोसा करते हैं. ये वो कार्य हैं जो उन्होंने किया है. ये मसीह में भरोसा करना नहीं है.

Lutzer: मैं लोगों को साफ बात कह कर चौंका देना पसंद करता हूँ: प्रार्थना आपको नहीं बचाती. न कभी इसने किसी को बचाया है और न कभी ये किसी को बचाएगी. यह अक्सर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचती है. मसीह में विश्वास हमें बचाता है. इसका मतलब भरोसे को मसीह पर लगाना है. आपको पता है जब वो चोर क्रूस पर था तो वास्तव में उसने भी जब यह कहा कि “मुझे याद रखना” तो उसने प्रार्थना नहीं की थी. ठीक है, मुझे लगता है वो प्रार्थना ही थी. “जब तू अपने राज्य में आये तो मुझे याद रखना” [ल्यूक 23:42]. लेकिन यह है कि चोर मसीह उसमें था कि विश्वास था. और यह के लिए संभव है. विश्वास का मानव हृदय उसमें जनम नहीं किया गया , एक निर्णय कार्ड पर हस्ताक्षर करने, सही शब्दों कहना. मैं बताने की जरूरत है, जिस पर यही जो एक अच्छी बात है. एक सच्ची कहानी.

Ankerberg: ठीक है.

Lutzer: कनाडा में, कुछ लोग आये और उन्होंने एक गली में रहने वाले हरेक व्यक्ति को विश्वास में ले लिया, उन्होंने कहा कि, “हम आपको एक निर्धारित मूल्य पर सनोवर के पौधे लगाकर देंगे.” अतः सारे पड़ोसियों ने मिलकर कहा कि “चलो पौधे लगवा लेते है.” वे लोग आये, उन्होंने लोगों का पैसा लिया, और सनोवर लगा दिए. कुछ सप्ताह बाद ये सारे पौधे भूरे होने लगे. पड़ोसियों ने इनमें खूब पानी डाला. जितना वो पानी डालते रहे, उतना ही वो भूरे होते रहे. अंततः एक दिन किसी ने उन्हें देखा और सोचा, “इन्होंने किस तरह के पौधे लगाये हैं?” उसने उसे उखाड़ कर देखा और पाया कि उन्होंने यह काम किया था कि उन्होंने शाखाओं को मिट्टी में लगाया हुआ था. कोई जड़ नहीं थी. कुछ नहीं था. यीशु ने कहा, “हर पौधा जो मेरे पिता ने नहीं लगाया वह उखाडा जायेगा” [मत्ती 15:13]. क्या यह गंभीर बात नहीं है? इसलिए मैं विश्वास करता हूँ कि जो लोग आज हमें सुन रहे हैं, उनमें से बहुत से ऐसे होंगे, ओह, हम क्या कहें? वे दिखने में सनोवर की तरह नज़र आ सकते हैं. वे अन्य दूसरे पेड़ों की तरह नज़र आ सकते हैं, लेकिन उनकी जड़ें नहीं होतीं. परमेश्वर ने उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया है, उन्हें नया जन्म पाने का अद्भुत सौभाग्य प्रदान नहीं किया है क्योंकि उन्होंने सहमती दी होगी; पत्र पर हस्ताक्षर भी किये होंगे, लेकिन उन्होंने कभी भी – मुझे यह अभिव्यक्ति पसंद है – उन्होंने कभी भी “उद्धार पाने योग्य विश्वास नहीं किया.” इसलिए हमें बहुत ही ध्यान रखना चाहिए.

Ankerberg: बचाने वाला विश्वास क्या होता है? इसका विपरीत है बौद्धिक विश्वास.

Lutzer: सही है, आपको पता है, जैसा कि मैं सोचता हूँ इसका उदाहरण यहीं इसी मेज पर उपलब्ध है. आपको पता है, एक ऐसी समझ है जिसमें होकर मैं ये विश्वास कर सकता हूँ कि यह कुर्सी मुझे संभाल सकती है. ये तो एक मानसिक सहमति है. लेकिन ये तब तक पूरी नहीं होती जब तक आप उस पर बैठते नहीं और यह नहीं कहते, “ठीक है, अब मैं इस पर स्वयं विश्वास करता हूँ.” और जब मैं इस पर स्वयं विश्वास करता हूँ, परमेश्वर का धन्यवाद हो, जॉन, आपकी ये कुर्सी मुझे सँभालने में सक्षम है. ठीक है? उसी तरह से, लोग कह सकते हैं, “मैं यीशु को प्यार करता हूँ. मैं उस पर भरोसा करता हूँ. मैं विश्वास करता हूँ कि वो एकमात्र उद्धारकर्ता है.” वे इस तरह का बौद्धिक विश्वास रख सकते हैं. लेकिन अगर मैं कहूं, मैं सोचता हूँ कि कई बार दुनिया की सबसे लम्बी दूरी दिमाग और दिल के बीच की होती है जहाँ पर विश्वास का स्थानांतरण होता है, जहाँ पर पापमय असहायता को पहचाना जाता है जो कहती है, “यीशु सिर्फ एक तू ही है. मेरा उद्धारकर्ता बन जा. मैं तुझे मेरे लिए अपनी जान देने वाले के रूप में ग्रहण करता हूँ.”

Ankerberg: जो कुछ मिनट बचे हैं, उसमें हम इस बात को समझाने के लिए मूसा और मरुस्थल में साँप को ऊँचे पर उठाये जाने की कहानी में चलते हैं..

Lutzer: ये बड़ी रोमांचक है. असल में यह यूहन्ना के तीसरे अध्याय में ही है, जिसमें हम पहले से ही थे. यीशु निकोदिमुस से बात कर रहा है और कहता है, “और जिस रीति से मूसा ने जंगल में साँप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए. ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनंत जीवन पाए” [यूहन्ना 3:14-15]. क्या तुम्हें ये कहानी याद है? लोगों में एक महामारी फैली थी. वे अनाज्ञाकारिता की वजह से परमेश्वर द्वारा श्रापित थे और परमेश्वर ने एक महामारी को भेजा था. मूसा ने कहा, “मैं क्या करूँ?” और परमेश्वर कहता है, “तुम एक साँप लो” – मैं सोचता हूँ यह एक पीतल का साँप था, एक सर्प – “एक तेज विषवाले सांप की प्रतिमा बनवाकर खम्भे पर लटका; तब जो सांप से डसा हुआ उसको देख ले वह जीवित बचेगा” [गिनती 21]. अब, जॉन, मैं यह कल्पना कर सकता हूँ कि उनके बीच में कुछ वैज्ञानिक, कुछ संदेहवादी रहे होंगे, मुझे निश्चय है वहाँ ऐसे लोग होंगे जिन्होंने कहा होगा, “इसमें रत्ती भर भी कोई समझ की बात नहीं है!” इसमें क्या सम्बन्ध हो सकता है कि मैं एक खम्बे पर लटके हुए साँप को देखूं जो कि मुझ से बाहर है, वह मेरे शरीर की बीमारी पर कैसे प्रभाव डाल सकता है और बीमारी की बढ़ोतरी को कैसे रोक सकता है?” वैज्ञानिक रूप से, आयुर्विज्ञान रूप से, बौद्धिक रूप से इसमें कोई भी समझ की बात नहीं है. लेकिन तुम्हें एक बात पता है, परमेश्वर कहता है, “अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं एक चमत्कार करूंगा.”

आज सुनने वालों में कुछ ऐसे लोग होंगे जो कह रहे होंगे, “तुम्हें इस यीशु की बहुत साल पहले हुई मौत का धन्दा पता है, 2000 साल पहले हुई उसकी मौत से मेरा क्या लेना देना? इसका क्या सम्बन्ध है?” परमेश्वर सम्बन्ध पैदा करता है. और आज कुछ लोग ऐसे होंगे जो यीशु की ओर देख रहे होंगे, जो यीशु की ओर एक विश्वास की दृष्टि से देख सकते हैं और यीशु को खम्बे पर नहीं बल्कि क्रूस पर देखने के परिणामस्वरूप, जहाँ वह मरा और जी उठा और स्वर्ग में ऊपर चढ़ गया और जो कहता है, “मैं उसे पाना चाहता हूँ.” जो वो पाएंगे वो सिर्फ ये नहीं कि वे धर्मी ठहराए जायेंगे, जिसके बारे में हमने अपने पिछले कार्यक्रम में विस्तार से विचार-विमर्श किया था, बल्कि कुछ और ही होगा. एक चमत्कार होगा जो उनके दिलों में होगा और वे यह कहेंगे, “मैं इसे समझ नहीं पाता, मगर यह हुआ है.” इसे नया जन्म कहा जाता है.

Ankerberg: हो सकता है जब आप इसी वक्त सुन रहे हैं तो आप निकोदिमुस के समान हों. आप धर्मिक हैं. आपके पास नियम हैं पर कोई सच्चाई नहीं है. और इरविन मैं चाहता हूँ जो लोग नये जन्म का एक चमत्कार चाहते हैं आप उनके लिए एक प्रार्थना करें. वे चाहते हैं कि परमेश्वर उनके लिए यह कार्य करे. क्या आप प्रार्थना करेंगे?

Lutzer: जॉन, मैं इन लोगों को यह बात बताना चाहता हूँ कि आज कोई सुनने वाला ऐसा भी हो सकता है जो कहता होगा, “हाँ, सच है पर मैंने बहुत सारे पाप किये हैं.” लेकिन मुद्दा आपके बहुत सारे पापों या अपराधों का नहीं है, मुद्दा यह है कि क्या आप उस चमत्कार, और उस सुन्दरता, और यीशु की उस पूर्णता की ओर देखने के इच्छुक हैं या नहीं जो यीशु ने क्रूस पर पूरी की. अतः जो कोई भी विश्वास करने की इच्छा रखता है उसे पीछे नहीं छोड़ा जायेगा.

Ankerberg: बिल्कुल सही.

Lutzer: तो आइये प्रार्थना करें. हे पिता, हम आपको बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं कि यीशु हमारे लिए मरने को आया. हम आपका धन्यवाद करते हैं कि वह क्रूस पर ऊँचा उठाया गया, और जो उसे विश्वास से देखते हैं वे उसके वरदान को ग्रहण करते हैं. और हम आज प्रार्थना करते हैं कि बहुत सारे लोग पवित्र आत्मा के द्वारा नया जन्म प्राप्त करेंगे क्योंकि उन्होंने ऊपर उठाये गए मसीह की ओर देखा है. और आप उन्हें योग्यता दें कि वे इस तरह की प्रार्थना कर सकें: “परमेश्वर, मैं जानता हूँ कि मैं पापी हूँ. मैं अपने आपको नहीं बचा सकता. पाप की बीमारी मेरे शरीर में समाती है, मेरे मन को दूषित करती है. लेकिन इस क्षण मैं मसीह की ओर देखता हूँ. मैं उसे मेरे पापों को उठा ले जाने वाले के रूप में स्वीकार करता हूँ. मैं व्यक्तिगत रूप से उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करता हूँ.” परमेश्वर वे अनंत जीवन का आश्वासन प्राप्त कर सकें. यीशु के नाम में. आमीन.

Ankerberg: इरविन, यह अच्छी बात रही. अगले सप्ताह हम इसे आगे जारी रखेंगे. हम किस विषय पर बात करेंगे?

Lutzer: जॉन, हम ऐसे व्यक्ति के बारे में बात करेंगे जो यह कहता है, “मैं 99 बार बचाया गया.” और हम इस बारे में बात करेंगे कि क्या यह जानना सम्भव है या नहीं कि आप अनंतकाल के लिए बचा लिए गए हैं.

Ankerberg: आप सब ही इस बात को जानना चाहते हैं. इसलिए हमारे साथ अवश्य जुड़ें.