पवित्र शास्त्र की विशिष्टता के लिए 20 कारण

द्वारा: Dr. John Ankerberg Dr. John Weldon; ©1995

1. बाइबल ही दुनिया की एकमात्र ऐसी पुस्तक है जो परमेश्वर का वचन होने का वस्तुनिष्ठ प्रमाण प्रदान करती है. केवल बाइबल अपनी दिव्य प्रेरणा का वास्तविक प्रमाण देती है.

2. बाइबिल केवल दुनिया कि एकलोती धार्मिक शास्त्र है जो दोषातीत है.

3. बाइबल ही एकमात्र ऐसी प्राचीन पुस्तक है जो वैज्ञानिक और चिकित्सा पूर्वज्ञान के साथ प्रमाणित है. किसी भी अन्य प्राचीन पुस्तक का वैज्ञानिक रीति से सावधानीपूर्वक विश्लेषण नहीं किया गया, बल्कि कई आधुनिक पुस्तकें भी बाइबल और आधुनिक विज्ञान के विषय पर लिखी गई हैं.

4. बाइबल ही एकमात्र ऐसा धार्मिक लेखन है, जो अनन्त उद्धार को परमेश्वर के अनुग्रह और दया से मिले मुफ्त उपहार के रूप में प्रदान करता है.

5. बाइबल ही एकमात्र ऐसा प्रमुख प्राचीन धार्मिक लेख है जिसका संपूर्ण वाचनिक संरक्षण लगभग हस्तलिपि के रूप में स्थापित है.

6. बाइबल का नैतिक मानक सभी पुस्तकों से ऊँचा है.

7. केवल बाइबल का आरंभ दिव्य आज्ञा के द्वारा ब्रह्मांड के निर्माण के साथ शुरू होता है, और इसमें, अकसर संक्षिप्त रूप से और बीच-बीच में, पहले मानव, आदम, से मानव जाति के इतिहास के अंत तक का ऐतिहासिक लेखा है.

8. केवल बाइबल में दुनिया के आनेवाले उद्धारकर्ता के बारे में विस्तृत भविष्यद्वाणियाँ हैं, ऐसी भविष्यद्वाणियाँ जो इतिहास में सच साबित हुई हैं.

9. केवल बाइबल ही मानव प्रकृति का एक पूरी तरह से यथार्थवादी दृष्टिकोण, अपने पापों के लिए लोगो को दोषी सिद्ध करने की शक्ति, और मानव स्वभाव को बदलने की क्षमता रखती है.

10. केवल बाइबल में अद्वितीय धर्मशास्रीय सामग्री है, जिसमे प्रमुख धर्मशास्त्र (त्रिएकता; परमेश्वर के गुण); सोतेरिओलोजी (दुराचार, दोषारोपण, अनुग्रह, शांति प्रायश्चित, मेल-मिलाप, नया जीवन, मसीह के साथ मिलन, धर्मी ठहराया जाना, ले पालक करना, पवित्रीकरण, अनन्त सुरक्षा, चुनाव,आदि.); क्रिस्तोलोजी (अवतरण, तात्विक मिलन); न्यूमातोलोजी (पवित्र आत्मा का व्यक्तित्व और काम); एस्कतोलोजी (इतिहास के अंत की विस्तृत भविष्यवाणियाँ); एक्लिशिओलोजी (मसीह की दुल्हन के रूप में और उसके साथ एक आध्यात्मिक जैविक संघ में चर्च की प्रकृति) आदि शामिल हैं.

11. केवल बाइबल ही ऐसी पुस्तक है जो मानव के पाप और बुराई की समस्या के लिए एक वास्तविक और स्थायी समाधान उपलब्ध कराती है.

12. केवल बाइबल ही ऐसी पुस्तक है जो पुरातत्व, विज्ञान, आदि के द्वारा इतिहास में अपनी सटीकता की पुष्टि करती है.

13. बावजूद इसके कि यह तीन महाद्वीपों पर तीन भाषाओं में 40 से अधिक लेखकों द्वारा 1500 साल की अवधि में लिखी गई है, बाइबल की आंतरिक और ऐतिहासिक विशेषताएँ इसकी एकता और आंतरिक स्थिरता में अद्वितीय हैं, और विवादास्पद विषयों पर चर्चा के बावजूद इसकी सभी मुद्दों पर सहमति है.

14. बाइबल इतिहास में सबसे अधिक, अनुवादित, खरीदी गई, याद की गई, और सताव का सामना करनेवाली पुस्तक है. उदाहरण के लिए, इसका अनुवाद लगभग 1700 भाषाओं में किया गया है.

15. केवल बाइबल ही ऐसी पुस्तक है जिसका एक चौथाई हिस्सा भविष्यवाणियाँ हैं, जिसमें भविष्यवाणियों के लगभग 400 पृष्ठ हैं.

16. केवल बाइबल ही ऐसी पुस्तक है जो 2000 सालों से आलोचकों द्वारा की गई गहन जाँच को झेल सकी है, और न केवल इस तरह के हमलो से बची, वरन् समृद्ध भी हुई है, और ऐसी आलोचनाओं से उसने अपनी विश्वसनीयता को और भी मज़बूत बनाया है. (वॉल्टेयर ने भविष्यवाणी की थी कि बाइबल 100 साल के भीतर ही विलुप्त हो जाएगी, लेकिन 50 साल के भीतर वॉल्टेयर विलुप्त हो गया, और उसका घर जिनेवा बाइबल सोसाइटी की बाइबिलों को रखने का गोदाम बन गया.)

17. किसी भी अन्य पुस्तक की तुलना में, पश्चिमी सभ्यता के इतिहास को बाइबल ने अधिक गढ़ा है. किसी भी अन्य पुस्तक की तुलना में, दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित बाइबल ने किया है.

18. केवल बाइबिल अपने 66 पुस्तकों में से प्रत्येक के लिए एक व्यक्ति विशेष (मसीह केन्द्रित) प्रकृति रखता है, उस व्यक्ति के जीवन ,प्रकार, प्रतिरूप आदि का विवरण, उसके पैदा होने से 400-1500 साल पहले करता है.

19. केवल बाइबल अपने केंद्रीय व्यक्ति के पुनरूत्थान की उद्घोषणा करती है, और जिसे ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित भी किया जा सकता है.

20. केवल बाइबल इस बात के ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध कराती है कि सच्चा परमेश्वर मानव जाति से प्यार करता है.