मृत्यु के भय से स्वतंत्रता

द्वारा: Dr. John Ankerberg; ©2000

हमारी मृत्यु के उस क्षण के बाद क्या होता है? मेरे लिए, यह एक बहुत ही व्यक्तिगत विषय है, क्योंकि मैंने अपने तीन प्रियजनों को मरते हुए देखा है पिछले ग्यारह महीने में. पहले, मेरे पिता, फिर मेरी आंटी और फिर मेरे चचेरे भाई का 13 साल का बेटा. दिनबदिन, मैं उनके बगल में बैठकर डोक्टरों को उनके आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और दवाइयों का प्रयोग करते हुए देखता था परन्तु फिर भी मृत्यु आ ही गई. मैं स्वयं पीड़ा के हर स्तर से होकर गुज़रा हूँ. उनके अंतिम संस्कार में मैंने उनके ताबूत में उन्हें देखा, उनके ठन्डे हाटों को छुआ और मृत्यु को करीब से देखा. जब आप मृत्यु को इतने करीब से देखते हैं, वह बहुत बदसूरत होती है, और आप समझ जाते हैं की क्यों हम सब उससे डरते हैं. मैंने दो अंतिम संस्कारों में प्रचार किया है पर यह सोचने से नहीं रहा गया की वे अब कहाँ है? जैसे उनके मित्रगण और परिवार उन्हें याद करते हुए इक्कठे होते हैं, मैं सोचता हूँ, ये क्या कर रहे हैं? वे अभी क्या अनुभव कर रहे होंगे?

बाइबिल का परमेश्वर इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर देता है. पहला, बाइबिल कहती की हमें मृत्यु के बारे में आनंदित नहीं होना है. हमें यह कहने की आवश्यता नहीं की, “परमेश्वर यही चाहता है”. इसकी बजाये बाइबिल कहती है की मृत्यु एक शत्रु है, परमेश्वर और हमारा भी.

प्रेरित पौलुस लिखते हैं, “क्योंकि जब तक वह अपने बैरियों को अपने पावों टेल न ले आये, तब तक उसका राज्य करना अवश्य है. सब से अंतिम बैरी जो नाश किया जायेगा, वह मृत्यु है”. (1 कोर. 15:25-26).

यह मेरे लिए सांत्वना देने वाला है. परमेश्वर भी हमारी तरह मृत्यु को पसंद नहीं करता. वह उसे शत्रु कहकर पुकारता है. मृत्यु परमेश्वर का बैरी/शत्रु क्यों है? क्योंकि वह जीवन को नष्ट करता हैं जबकि परमेश्वर सृष्टिकर्ता है, जीवन का दाता है. जब मनुष्य ने पाप करना चुना, परमेश्वर का विरोध किया, उसका पाप ने मृत्यु को उत्पन्न किया. बाइबिल १ कुरिन्थियों 15:21, में कहती है, ” क्योंकि मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई.” रोमियों 5:12 कहती है, “इसीलिए जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई और इसी रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फ़ैल गई, इसलिए कि सभी ने पाप किया.”

जब मनुष्य ने पाप किया, मृत्यु हमारे अस्तित्व में प्रवेश कर गया और वह बैरी बन गया जो एक बच्चे को छीन लेता है जिसने धूप में खेलना अभी सीखा ही नहीं. यह वो शत्रु है जो एक किशोरे का जीवन ले लेता है जिसने अभी जीवन का आनंद उठाना आरम्भ ही किया था. मृत्यु वह शत्रु है जो एक नए शादीशुदा जोड़े में से पति को उसकी प्रिय पत्नी से छीन लेता है जब जीवन बहुत मधुर था, मृत्यु जो छोटे बच्चों से उनके प्रिय माता पिता को छीन कर उन्हें अनाथ छोड़ देता है. परन्तु बाइबिल यह भी कहती है यीशु मसीह के द्वारा, यह शत्रु- मृत्यु- का सामना कर सकते है और हमें इस बात का निश्चय है अंत में मसीह इसे पूरी रीति से मिटा देंगे.

प्रकाशितवाक्य 21:4 कहता है, “और वह उनकी आखों से सब आंसू पोंछ डालेगा और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं”

जब मैंने अपने चचेरे भाई के 13 साल के बेटे को ताबूत के अन्दर देखा, मैंने उसके जुडवें भाई जोशुआ से कहा की हमें जोएल की मृत्यु के बारे में खुश नहीं होना है. मृत्यु एक शत्रु है और उस कारण में एक है की यीशु मसीह इस संसार में आये.उन प्रत्येक के लिए जो यीशु मसीह पर विश्वर करते है, मृत्यु हमें डंक मार सकती है परन्तु हम पर विजयी नहीं हो सकती. यह की, मृत्यु हमें मिटा नहीं सकती और हमारे अस्तित्व को रोक नहीं सकती. यह सबका अंत नहीं है.

जैसे पौलुस 1 कुरिन्थियों 15:55 में कहतें हैं, “हे मृत्यु! तेरी जय कहाँ है? हे मृत्यु तेरा डंक कहाँ रहा? मृत्यु का डंक पाप है और पाप का बल व्यवस्था है”. इसका अर्थ क्या है? क्योंकि हमने पाप किया है, हम उस मृत्यु के डंक को अनुभव करेंगे. परन्तु मसीही होने के नाते अंतत नष्ट नहीं होंगे?

हम सब भिंड और भौरें से डरते है वे हमारे आसपास उड़कर हमें डंक मार सकते हैं. परन्तु यदि हम उनके डंकों को निकाल दें, वे डरावने तो दिखेंगे, पर वे हानिकारक नहीं होंगे. क्योंकि यीशु मसीह और उनका यह वायदा की जो उनपर विश्वास करेंगे उन्हें अनंत जीवन मिलेगा, मृत्यु अब उस भौरें के समान है जिसका डंक निकाल दिया गया हो. वह हम सब के पास आयेगा परन्तु मसीही के लिए, मृत्यु हम पर विजयी नहीं होती और न ही हमें नष्ट करती है.

बाइबिल कहती है, ” पाप की मजदूरी तो मृत्यु है परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभू यीशु मसीह में अनंत जीवन है”. रोमियों 6:23

साथ ही, मृत्यु हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग नहीं कर सकती. प्रेरित पौलुस रोमियों 8:38 में लिखते हैं, “क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी”

इसलिए पहले, परमेश्वर का वचन हमसे कहता है, विश्वासियों के लिए, मृत्यु जो एक शत्रु जिसके ऊपर आंशिक रूप में विजय पा ली गयी है, उसका डंक निकाल दिया गया है, और एक दिन वह यीशु मसीह के द्वारा पूरी तरह मिटा दिया जायेगा.

दूसरा, क्या होगा यदि हम मसीही है और हमसे कहा गया हो की हमें एक लाइलाज रोग है और कुछ ही दिनों, हफ्ते या महीनो में मृत्यु का अनुभव करेंगे? हम अपने भय को किस प्रकार संभाल पाएंगे? मृत्यु अज्ञात है, कुछ ऐसा जिसका अनुभव हमने नहीं किया.

ठीक है, जब हम एक यात्रा पर निकलते हैं. हमें एक विश्वसनीय मार्ग नक़्शे की आवश्यता होती है. जब हम एक जीवन से दुसरे जीवन की ओर गुज़रते हैं, हम सब को एक विश्वसनीय मार्ग नक़्शे की आवश्यता है जो हमें निश्चित रूप में हमारे अंतिम गंतव्य को बता सके. सुनिश्चित है की यह मार्ग नक्षा परमेश्वर का वचन बाइबिल है.

एक विश्वसनीय मार्गदर्शक केवल कोई व्यक्ति नहीं जिसका मृत्यु के साथ करीबी अनुभव हुआ हो, जैसे किसी को दिल का दौरा पड़ा हो और फिर पुनर्जीवित किया गया हो, और वह जीवित रहकर हमें बाताए कि उसने क्या अनुभव किया था. हम उस पर विश्वास नहीं कर सकते. क्यों? क्योंकि बाइबिल कहती है की शैतान और उसके दूत हमें ऐसा अनुभव देकर धोखा देते है. बाइबिल कहती है कि शैतान स्वांग रचता है या मुखौटा लगाता है, “आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है” (2 कुरिन्थियों 11:14). 1.2 करोड़ अमरीकियों ने मृत्यु को निकट से अनुभव किया है, उनमें से अधिकतर लोग ज्योतिमर्य स्वर्गदूत के द्वारा धोखा दिए गए हैं जिसने उन्हें मृत्यु के बाद के जीवन के बारे गलत सूचना दिया है (ऐसी सूचना जीसके विपरीत बाइबिल में परमेश्वर ने कहा है).

नहीं, एकमात्र विश्वसनीय मार्गदर्शक जो निश्चित रूप में यह बता सकता है की मृत्यु के परदे के पीछे क्या है, वह केवल वही है जो वास्तव में मरा, और जो पुनर्जीवित नहीं किया गया. वह जिसका शरीर कब्र में ठंडी, टूटी और अकड़ी रही तीन दिन तक, और फिर मृत्यु में से जी उठा हो. एकमात्र व्यक्ति केवल जिसने मृत्यु पर जय पायी वह यीशु मसीह हैं. केवल उन्ही के पास अधिकार है, वह अधिकारी जो हमें बता सकता है की हमारे मृत्यु के बाद क्या होता है. और वह क्या कहता हैं?

जब यीशु मसीह लाज़र के कब्र के पास आये, उन्होंने जाना की लाज़र को मरे चार दिन हो गए. लाज़र की कब्र के ठीक बाहर यीशु इस बात की घोषणा करते है, ” पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा (युहन्ना 11:25-26).

इस दावे को करने के बाद कि उसके पास अनंतकाल का जीवन देने की सामर्थ है, उन्होंने अपने दावे का सबूत प्रस्तुत किया. उन्होंने वास्तव में लाज़र को मृत्यु से जिलाया. मृत्यु हम सब का होना है. इसलिए हमें भविष्य के लिए किसी पर भरोसा रखना है. क्या हमारे पास ऐसा कोई कारण है यीशु मसीह पर विश्वास न करने के लिए?

प्रेरित युहन्ना ने इस हद तक कहा, “जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है; जिस ने परमेश्वर को प्रतीति नहीं की, उस ने उसे झूठा ठहराया; क्योंकि उस ने उस गवाही पर विश्वास नहीं किया, जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है. और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है. जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है. मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है”.(1 युहन्ना 5:10-13) बाइबिल कहती है, ” क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए (युहन्ना 3:16). यदि आप मृत्यु के निकट जा रहे हों और आपको डर लग रहा हो, परमेश्वर चाहते हैं की आप उनके वायदों पर जो आप के लिए हैं विश्वास करें. यदि आप बस उनके पुत्र प्रभू यीशु मसीह पर विश्वास करें और उनसे कहें की वे आपके पाप क्षमा कर दें, और आपके जीवन के उद्धारकर्ता बन जायें, परमेश्वर वायदा करते हैं की मृत्यु केवल आपके लिए एक जीवन से उनके साथ स्वर्गीय जीवन की ओर एक यात्रा होगी. यीशु ने कहा, “तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जा रहा हूं और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो. (युहन्ना 14:1-3)

प्रेरित पौलुस, अपनी मृत्यु के निकट आते समय इस प्रकार लिखते हैं, “क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा(शरीर की ओर संकेत) घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन(नया शरीर) मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्वर्गीय घर को पहिन लें कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं (2 कुरिन्थियों 5:1-3). वास्तव में पौलुस दृढ़ता से कह सकता था कि, ” देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं” (2 कुरिन्थियों 5:8)

इसका अर्थ क्या है? जब हम मरेंगे, हमारे शरीर को मिट्टी में रखा जायेगा और हमारी आत्मा परमेश्वर के पास चली जाएगी. उदहारण के लिए, बाइबिल में स्पष्ट रूप से शरीर के विश्राम स्थान को कब्र और मरे हुओ की आत्मा के इक्कठे होने के स्थान को शेओल कहकर अलग किया हुआ है. पुराने नियम में मृत्यु के बाद जीवन के लिए इब्रानी शब्द शेओल का उपयोग 65 बार किया गया है. शेओल दिवंगत आत्माओं के दायरे को दर्शाता है. इस क्षेत्र का वर्णन करने के लिए, सब लोगों का इस दायरे में एक जैसा अनुभव नहीं है. कुछ लोगों के लिए यह क्षेत्र उदासी का है. परन्तु अन्य लोगों के लिए यह एक स्थान है परमेश्वर के साथ बसने के लिए.

नए नियम में शेओल के लिए यूनानी शब्द है पाताल, शेओल जैसा ही, पाताल शब्द का उपयोग केवल कब्र के लिए नहीं है परन्तु दिवंगत आत्माओं के संसार की ओर संकेत करता है. यीशु की मृत्यु और पुनरुथान से पहले, वे शेओल या पाताल, मृतकों का दायरा को दो विभाग होने का वर्णन करते हैं.

लूका 16 में यीशु एक धनी मनुष्य और एक लाज़र नामक भिखारी के विषय में बताया गया है, उनकी मृत्यु का वर्णन करने के बाद, सुनें की यीशु क्या कहते है कि उनके साथ हुआ, “वह धनवान भी मरा; और गाड़ा गया और पाताल (पुराने नियम के शेओल का यूनानी अनुवाद) में उस ने पीड़ा में पड़े हुए अपनी आंखें उठाई, और दूर से इब्राहीम की गोद में लाजर को देखा और उस ने पुकार कर कहा, हे पिता इब्राहीम, मुझ पर दया करके लाजर को भेज दे, ताकि वह अपनी उंगुली का सिरा पानी में भिगो कर मेरी जीभ को ठंडी करे, क्योंकि मैं इस ज्वाला में तड़प रहा हूं परन्तु इब्राहीम ने कहा; हे पुत्र स्मरण कर, कि तू अपने जीवन में अच्छी वस्तुएं ले चुका है, और वैसे ही लाजर बुरी वस्तुएं: परन्तु अब वह यहां शान्ति पा रहा है, और तू तड़प रहा है और इन सब बातों को छोड़ हमारे और तुम्हारे बीच एक भारी गड़हा ठहराया गया है कि जो यहां से उस पार तुम्हारे पास जाना चाहें, वे न जा सकें, और न कोई वहां से इस पार हमारे पास आ सके”.

यीशु मसीह की इस कहानी से हम इस प्रश्न का उत्तर दे सकतें हैं कि, ” हमारे मरने के बाद कितना समय लगेगा यह निर्धारित करने के लिए की हम स्वर्ग में हैं या नरक में?

यीशु का उत्तर, ” धनी मनुष्य ने इस जीवन में अपनी आँख बन्द की और दुसरे जीवन में उसे खोल दी. यह बहुत शीघ्र था! पाताल में एक अविश्वासी होने के नाते, यह धनी मनुष्य पूरी तरह से होश में था. उसके पास एक आत्मिक देह थी जो बातें कर सकती थीं, महसूस कर सकती थी, और पीड़ा को भी अनुभव कर सकती थी. वह अपने पुराने जीवन को भी याद कर सकता था.

हम यह भी देखते हैं की यह शाश्वत भाग्य अपरिवर्तनीय रूप में तय हो गया था. अब्राहम ने उससे कहा, “हमारे और तुम्हारे बीच एक भारी गड़हा ठहराया गया है कि जो यहां से उस पार तुम्हारे पास जाना चाहें, वे न जा सकें, और न कोई वहां से इस पार हमारे पास आ सके”.इसका अर्थ है की एक बार आप उस मृत्यु के फाटक से होकर निकल ए आपका अंतिम गंतव्य हमेशा के लिए तय हो चूका है. आप उसको बदल नहीं पाएंगे.

विश्वास करने वाले व्यक्ति लाज़र का क्या हुआ? यीशु ने कहा लाज़र को स्वर्गदूत उस पाताल क्षेत्र शेओल या पाताल जिसे यहाँ अब्राहाम की गोद कहा गया है, ले गए. वहां उसे आराम पंहुचा और वह खुश था. यह रुचिकर है कि नए नियम में मसीह की मृत्यु, पुनरुथान और स्वर्गारोहण के बाद, विश्वासियों को उस पाताल लोक में जाना नहीं पड़ेगा जहाँ धर्मी आत्माएं रहती थी. नहीं. विश्वासी अब सीधे स्वर्ग में जा सकते हैं. दुसरे शब्दों में पाताल के दो क्षेत्र अब अगल बगल में नहीं है. आज अब्राहम की गोद अब स्वर्ग में हैं. परन्तु अधर्मियों के लिए पाताल अभी भी है. बाइबिल कहती है प्रकाशितवाक्य 20:14 के अनुसार एक दिन पाताल और उसके सब रहनेवालों समेत अनंत नरक में फैंक दिया जायेगा.बाइबिल परमेश्वर का इस संसार का न्याय करने को भयावह शब्दों में उल्लेख किया है; “और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उस में थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उन में थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया और मृत्यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए; यह आग की झील तो दूसरी मृत्यु है और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया. (प्रकाशितवाक्य 20:13-15)

बाइबिल नहीं सिखाती की एक शोधन-स्थल है. बाइबिल किसी भी प्रकार के अस्थायी स्थान के बारे में नहीं कहती जहाँ दण्ड और शुद्ध किया जाता हो जिसे लोग सहकर बाद में स्वर्ग चले जाते हो, कुछ 1,000 या 10,000 साल तक कष्ट सहने के बाद.नहीं. बाइबिल यह कहती है की पाताल को एक दिन नरक में डाला जायेगा, परन्तु लोगों को फर्क उनके पाताल के विभाग के अनुसार ही पड़ेगा. दण्ड में कोई अंतर नहीं होगा. अविश्वासी लोग जो मरेंगे किसी भी तरह उस पीड़ा और अनंत कष्ट जो नरक का भाग है उससे बच नहीं पाएंगे.
प्रेरित पतरस हमसे स्पष्ट कहतें हैं कि, “तो प्रभु अपने भक्तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधमिर्यों को न्याय के दिन तक दण्ड की दशा में रखना भी जानता है” (2 पतरस 2:9).

कुछ लोग पूछते हैं, “मेरे शरीर का क्या होगा? जब मैं मरूँगा मेरी आत्मा के साथ क्या होगा?” याकूब कहता है, “आत्मा के बिना शरीर मरा हुआ है.” मतलब, शरीर मिट्टी में चला जाता है और यदि आप मसीही हैं, आपकी आत्मा परमेश्वर के पास चली जाती है, “शरीर से अनुपस्थित [अचानक] होने का अर्थ है परमेश्वर के साथ उपस्थित होना.

परन्तु दूसरी तरफ, यदि आप एक अविश्वासी हैं, यदि आप ने अपना विश्वास यीशु मसीह पर और जो उन्होंने क्रूस पर आपके लिए किया, नहीं रखा है, तो आपका शरीर मिट्टी में मिल जाता है और आपकी आत्मा पाताल में चली जाती है जहां कोई आशा नहीं, केवल पीड़ा और कष्ट है.

बाइबिल यह भी सिखाती है की यीशु मसीह के आगमन पर, जिन्होंने उस पर विश्वास किया है, उनकी आत्माएं उनके शरीर के साथ फिर मिल जाएँगी. परन्तु परमेश्वर उनके शरीर को पुनर्जीवित करके उसे नया बना देंगे. 1 थिसुलोनिकियों 4:14 और आगे यह कहता है, “तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं (मतलब जो मर गायें हैं और यीशु पर विश्वास रखते थे); और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे”.

इसीलिए यीशु ने युहन्ना 6:40 में कहा, “क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा.”

दूसरी तरफ, जिन्होंने यीशु का इन्कार किया है, उनका शरीर दफ़न रहेगा परन्तु उनकी आत्माएं पाताल लोक में चली जाएँगी.

पुराने नियम में दानिएल पुनरुथान की ओर संकेत देता है जब विश्वासी और अविश्वासी दोनों के शरीर उनकी आत्माओं के साथ मिल जायेंगे. ” और बहुतेरे जो पृथ्वी की धूल में सोये हैं (शरीर की ओर संकेत) जाग उठेंगे; कुछ अनंत जीवन के लिये परन्तु कुछ निंदा और अनंत अपमान के लिये.”

यीशु मसीह ने मत्ती 25 में सिखाया की दुष्टों की आत्मा एक दिन उनके शरीर के साथ एक हो जाएगी, फिर उनके जीवन का न्याय होगा. एक सही न्याय के बाद, यीशु, अनंत न्याय करने वाला, उनसे जो अधर्मी पाए गए हैं कहेगा, ” हे शापित लोगो, मेरे सामने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है..” यह अनंत दण्ड की ओर चले जायेंगे, परन्तु धर्मी अनंत जीवन में प्रवेश करेंगे.

यदि आप एक अविश्वासी हैं, तो आपको मृत्यु से डरना चाहिए जिसको आप अपनी मृत्यु के तुरंत बाद अनुभव करेंगे. आपको कैसे कोई इस मृत्यु के भय से बचा सकता है? यह तभी संभव होगा यदि आप प्रभु यीशु पर विश्वास करेंगे.

इब्रानियों की पुस्तक 2 अध्याय की 15 आयात कहती है, “यीशु मसीह इसलिए आये कि जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले.”

हम सरलता से मृत्यु से डरते है, क्योंकि हमें नहीं मालूम की मृत्यु के बाद क्या है. हम मृत्यु से इसलिए डरते हैं क्योंकि, यदि परमेश्वर है, हम उससे मिलना नहीं चाहते. हम डरते हैं की हम उनके मापदंडो में खरे नहीं उतरेंगे. यदि यही आपका डर है, बाइबिल आपके साथ सहमत है. हम में से कोई भी परमेश्वर के मापदण्ड में खरा नहीं उतर सकता. हम सब पापी हैं. इसलिए परमेश्वर, जो हमसे प्रेम करते हैं, “अपने एकलौते पुत्र को इस संसार में भेजा, संसार को दोषी ठहराने के लिए नहीं, परन्तु उनके द्वारा यह संसार बचाया जाये.”

बाइबिल कहती है की परमेश्वर हमें एक उपहार देना चाहते हैं. “परमेश्वर का वरदान मसीह यीशु में अनंत जीवन है” (रोमियों 6:23)

दुसरे शब्दों में, परमेश्वर चाहते हैं की हम अनंत जीवन पाएं. वे चाहते हैं कि हमारे पाप क्षमा हो जायें. इसलिए उन्होंने मसीह को भेजा. जीसके द्वारा आप एक बार और अपना विश्वास यीशु पर रखतें हैं, परमेश्वर हमें अनंत जीवन का उपहार देतें है.

बाइबिल के लेखक हमारी आने वाली मृत्यु और स्वर्ग की आशा को एक पानी के जहाज़ की तरह वर्णन करते हैं जो खलबली वाले पानी के ऊपर तैर रहा है. हमें सुरक्षित रूप में पकडे रखने के लिए एक अच्छे लंगर की आवश्यकता है. ध्यान दें बाइबिल क्या कहती है: “जो शरण लेने को इसलिये दौड़े है, कि उस आशा को जो सामने रखी हुई है प्राप्त करें वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुंचता है जहां यीशु महायाजक बन कर, हमारे लिये अगुवे के तौर पर प्रवेश हुआ है.” इब्रानियों 6:18-19 . वचन हमारी आशा को लगर कहती है जो यीशु के हाथों में है. हमारा लंगर यीशु मसीह से जहां हम है वहाँ तक पहुँचता है, और यीशु नहीं हटेंगे. लंगर की तरह जहाज को सुरक्षित रीति के पकडे हुए. मसीह में हमारी आशा ही हमारी सुरक्षा का गारंटी है. जैसे जहाज़ का लंगर समुद्र की तलछट तक पहुँचता है, मसीही लंगर भी सत्य और स्वर्गीय पवित्र स्थान तक पहुंचे जहां यीशु परमेश्वर के साथ एक है. हम मसीह में सुरक्षित हैं.

दूसरा प्रश्न जो लोग पूछते हैं, दुःख और संकट का क्या? यदि आपने अपनी पत्नी, पति, बच्चा खोया है तो उनकी कमी आप कैसे संभालेंगे ? जान ले कि मसीहियों के लिए विलाप करना अच्छा और प्राकृतिक है. हमारा आंसू बहना ठीक है. यह प्राकृतिक है कि हम अपने प्रिय जनों की कमी महसूस करें. परन्तु “हम उनके समान विलाप न करें जिनके पास कोई आशा न हो.”

प्रेरित पौलुस कहतें हैं, “हम नहीं चाहते कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं(मतलब जो यीशु पर विश्वास करते थे और मर गए), अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं.” (1 थिस 4:13) पौलुस मसीहियों से विलाप करने की उम्मीद रखता है, परन्तु स्मरण रखें कि हम उससे फिर मिलेंगे.

जब दाउद को यह बताया गया की उसका पुत्र अब्शालोम मर गया है, बाइबिल कहती है, “तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोते हुए चढ़ गया; और चलते चलते यह कहने लगा, कि हाय मेरे बेटे अबशालोम! मेरे बेटे, हाय! मेरे बेटे अबशालोम! भला होता कि मैं तेरी जगह मरता, हाय! अबशालोम! मेरे बेटे, मेरे बेटे.” (2 शमूएल 18:33)

जब लाज़र की मृत्यु हुई मरियम और मार्था ने विलाप किया. जब यीशु आये, उन्होंने पुछा, “तुमने उसे कहाँ रखा है?”(लाज़र के बारे में). उन्होंने कहा, ” आओ और देखो.” और जब

यीशु वहां पहुंचे, बाइबिल सबसे छोटी आयात में कहती है “यीशु रोया”और जो वहां इक्कठे थे और देख रहे थे यीशु के बारे में कहने लगे , “देखो वह उससे कितना प्रेम करता है?” (युहन्ना 11: 35-36).

जब मृत्यु हमें प्रेम करने वालों से अलग करती है, बहुत बार हम ऐसा महसूस करते है कि जितना दुःख हमने सहा है उतना किसी और ने नहीं सहा. परन्तु दुःख सार्वभौमिक है.

बाइबिल कहती है की यीशु ने स्वयं इसका अनुभव किया. यहाँ तक की पिता परमेश्वर ने अपने बेटे को क्रूस पर दर्दनाक मौत मरते देखा है. हम अपने दुःख संकट परमेश्वर के पास ला सकते हैं, यह जानकर की वह उसको समझता और महसूस करता है.

वचन कहता है, ” क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे क्योंकि पवित्र करने वाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता पर कहता है, कि मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊंगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा और फिर यह, कि मैं उस पर भरोसा रखूंगा; और फिर यह कि देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्वर ने मुझे दिए इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले.” (इब्रानियों 2:10- 15)

बाइबिल फिर कहती है, ” इस कारण उस को चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्चित्त करे क्योंकि जब उस ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है.” (इब्रानियों 2: 17-18) यह इसलिए है क्योंकि, यीशु ने मृत्यु, दुःख और परीक्षा का अनुभव किया, हम अपने दुःख उनके पास ला सकते हैं. वह अनुग्रहकारी और विश्वासयोग्य है. वो हमरे दर्द को जो हमने सहा है समझते हैं.

यदि आप अभी विलाप कर रहे हैं, मैं चाहूंगा की आप परमेश्वर के इन वायदों को जाने जिनसे मुझे बहुत मदद मिली है. इन पर ध्यान करें और मैं एक और देता हूँ.

परमेश्वर कहता है कि हम याद करें की यदि हमारे प्रिय जन, यीशु पर विश्वास रखते हुए मरे हैं, तो वे पहले से अधिक जीवित है. अपने पिता, आंटी या चचेरे भाई के13 साल का बेटे के बारे में सोचूँ , यदि मुझे यह पता हो की वे हवाई जहाज़ में बैठकर बहामा में गया है और मुझे पता हो की वह अभी समुद्र तट पर बैठा होंगा और सुन्दर समुद्र में तैर रहा होंगा, मैं उसकी कमी ज़रूर महसूस करूँगा, परन्तु मुझे बुरा नहीं लगेगा. मैं जानूंगा की वह वहां अच्छा समय बिता रहा है, मैं केवल ये आशा करूँगा की मैं भी उनके साथ शामिल हो जाऊं. इसलिए, यदि आपके प्रियजन यीशु पर विश्वास करते हुए मरे हैं, वे बहामा से भी अच्छी जगह पर हैं. वे स्वर्ग में है, पिता के घर में जहां बहुत से महल हैं.

यीशु ने कहा, ” मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा.” (यूहन्ना 10:27-28)

जब प्रेरित पौलुस ने स्वर्ग के विषय में बताने का प्रयास किया, उसके पास शब्द कम पड गए इसका वर्णन करने के लिये, उसने कहा, “कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं.” (1 कुरिन्थियों 2:9)

मसीह का धन्यवाद, हम मृत्यु के भय से स्वतंत्र हो सकते है. हम निश्चित रूप से जान सकते हैं की स्वर्ग ही हमारा अंतिम गंतव्य है. यदि आपके प्रिय जन मसीह के साथ हैं, तो आप के पास आशा है उनके पास जाने की, उनको दुबारा देखने की. वे अभी मसीह के साथ हैं.

यदि आप प्रभु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में नहीं जानते और आपके प्रिय जन मर जाते हैं, तो आप अपने प्रिय जनों को फिर कभी देख नहीं पाओगे. हमें मृत्यु के लिए तैयार होना है. हम सब जानते हैं कि हम सबको मरना है, पर यह नहीं पता की कब. बाइबिल कहती है की परमेश्वर प्रत्येक को मौका देता है जब हम जीवित हैं और अपने जीवन का निर्णय करते हैं की अनंतता में हम किस प्रकार का जीवन बिताएंगे. विशेषकर हमें अभी निर्णय लेना है की क्या हम यीशु मसीह पर विश्वास करेंगे और उनके उद्धार के उपहार को पाएंगे या उनपर विश्वास न करते हुए अनंतता के लिए स्वर्ग के परमेश्वर से अलग हो जायें.